चमोली उत्तराखंड का बेहद सुन्दर और घूमने के लिए पर्यटको के लिए
उत्तम पर्यटन स्थल है ा ऊँचे ऊँचे बर्फ से ढके पहाड़ मानो इस जगह की ख़ूबसूरती को निहारते नज़र आते हैं ा चमोली को चन्द्रपुरगढ़ी तथा अलकापुरी उपनामो से भी जाना जाता है ा उत्तराखंड के चमोली के समीप अलकनंदा नदी बहती हैा अगर आप शांतिमय वातावरण की तलाश में हैं तो इस जगह से और कोई अच्छी जगह नहीं हो सकती ा काफी संख्या में इसकीसुंदरता को निहारने इसकी तरफ खिंचे चले आते हैं ा चमोली में बहुत से मंदिर ताल एवं कई घूमने वाली जगह हैं
कर्णप्रयाग : कर्णप्रयाग चमोली में स्तिथ एक क़स्बा है ये अलकनन्दा
तथा पिंडर नदी के संगम पर स्तिथ है ा यहां पर आप प्रयाग संगम , कर्ण मंदिर , उमा देवी मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। जो की माँ दुर्गा का एक रूप है ा
कर्णप्रयाग का नाम महाभारत के प्रसिद्ध पात्र कर्ण पर पड़ा जिन्होंने कुन्ती के गर्भ से जन्म लिया ा कर्ण ने पांडवो के बड़े भाई होने के बावजूद भी कोरवो की तरफ से युद्ध लड़ा ा कर्ण सूरज पुत्र हैं। मान्यताओं के अनुसार यहां कर्ण अपने पिता सूर्य की आराधना किया करते थे ा ये भी कहा जाता है यहाँ कर्ण को शिव तथा गंगा के दर्शन हुए थे ा
ये मंदिर संगम के किनारे है यहां कर्ण और भगवन कृष्ण की बड़ी बड़ी प्रतिमाएं स्थपित है ा इस मंदिर के प्रांगण ,में ओर भी देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर हैं ा यहाँ उमा देवी के मंदिर में भी आप दर्शन करने
जा सकते हैं ा
फूलों की घाटी : युनेस्को द्वारा ऐसे विश्व धरोहर के रूप में घोषित किया गया हैा ये नंदा देवी अभ्यारण का ही एक हिस्सा है ा कहा जाता है की हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में यहां आए थे ये चारों तरफ से फूलों की की कई किस्मों से घिरा है इसलिए ऐसे वेली ऑफ़ फ्लॉवर भी कहते हैं फूलों की करीब पांच सौ से ज्यादा किस्में यहां देखने को मिलती हैं फूलों को पसंद करने वालों के लिए एक अच्छी घूमने की जगह है ा
हेमकुंड : ये सिक्खों का एक तीर्थ स्थल है ाहिमालय की ऊंचाई में स्तिथ यहाँ ठंडे पानी की झील है यहां का मौसम इतना ठंडा होता ये झील बर्फ़ की चादर से ढक जाती है ापर्वतों से पानी इस कुंड में जमा होता है तथा इस कुंड से छोटी छोटी जलधराएं झीलों में जाकर मिलती हैा इसके पास गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब हैा ये गुरुद्वारा श्री हेम कुंड साहिब की याद में बनाया गया है ा 










